Saturday, 23 June 2018

खामोश अल्फाज़

जिंदगी के २२ साल निकल चुके थे , ना जाने कितने अनजान लोगो से मिला और कितने अपने अनजान हो गये । खा़मोश रहा मैं , लेकिन खा़मोश अल्फाज़ मेरे ना जाने क्या बयां कर गये ।।।